सब कुछ जो आपको जानने की आवश्यकता है

ए नोट आफ काशन (परामर्श)

पालकगण को हमारी विशेष सलाह है कि विवरणिका को ध्यानपूर्वक पढ़ें ताकि अपने बच्चों को इस विद्यालय में प्रवेश दिलाने व उसे हमारे संरक्षण में देने से पूर्व इस तथ्य का निर्धारण कर लें कि आप शिक्षण की इस अलग पद्धति में विश्वास करते हैं और सहर्ष स्वीकार व सहयोग करने को राज़ी हैं।a

मिशन (लक्ष्य)

प्रोग्रेसिव एज्युकेशन में एक बालक/बालिका एक मशीन की भॉंति परीक्षाओं में केवल उच्च अंक प्राप्त करने वाला नहीं, अपितु उचित शिक्षा प्राप्त कर सम्पूर्ण व सफल व्यक्तित्व का स्वामी होता है। इस विद्यालय में प्रायः देश के अन्य विद्यालयों की भांति एक संकुचित, रूढ़िवादी व अपरिवर्तनीय (हठीला) शैक्षणिक वातावरण नहीं है।

हमारा लक्ष्य बालक/बालिका को कल की दुनिया में सफल होने हेतु सक्षम बनाना है- ऐसी दुनिया जो बालक/बालिका के भविष्य की हो।

एक बालक/बालिका के भविष्य की दुनिया क्या है ?

  • ज्ञान की ऐसी विस्फोटक व विस्मयकारी दुनिया आगे आती जाएगी जो किसी बालक/बालिका के लिये इस उम्र में समझना बहुत विस्तृत, विशाल और कठिन होगा।
  • एक व्यक्ति विज्ञान और तकनीक के जटिल परिणामों सेे घिरा होगा।
  • दिन प्रतिदिन ‘‘शिक्षित’’ जनसंख्या के विकास के कारण जीने की प्रतियोगिता विश्वव्यापी व प्रचण्ड होती जाएगी।

आॅब्जेक्टिव (उद्देश्य)

अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु हमने निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किये हैं।

एक बालक/बालिका

  • स्वयं चुने गए क्षेत्र के अनुरूप ज्ञान को ग्रहण करने व सफलतापूर्वक प्रयोग में लाने के कौशल से संपन्न हो।
  • में विज्ञान और तकनीक को समझने व आत्मसात् करने हेतु तर्कसंगत विवेचना व संकल्पनात्मक योग्यता विकसित हो।
  • मौखिक व लिखित अभिव्यक्ति में आत्मनिर्भर व आत्मविश्वासी हो। साथ ही, स्वतंत्र और सृजनात्मक विचार व क्रियाओं के योग्य हों।
  • ने व्यक्तिगत् व्यवसायिक जीवन में उचित निर्णय लेने हेतु आवश्यक मूल्य व चरित्र का अवगाहन किया हो। साथ ही, वह एक उत्तरदायी सामाजिक प्राणी हो।

हमने यह पाया है कि इन उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु दो प्रमुख समसामयिक बाधाएँ हैं:-

  • शिक्षा प्रदान करने हेतु पाठ्य-पुस्तकों पर प्रचलित निर्भरता एक बालक/बालिका की, आधारभूत बौद्धिक क्षमता तथा विकास को बुरी तरह अवरूद्ध करती है विशेषकर पूर्व प्राथमिक व प्राथमिक स्तर पर।
  • परीक्षा और मूल्यांकन पर बार-बार दोहराने का अत्यधिक ज़ोर जो बालक/बालिका के भविष्य के निर्धारण में कम ही महत्व रखता हैं। इसके विपरीत इनका बुरा असर बच्चे के साथ-साथ उसके परिवार पर भी पड़ता है।

द सिस्टम (पद्धति)

शिक्षा विशारदों द्वारा प्रदत्त पाठ्य-पुस्तकों के साथ जुड़ा विद्यमान पाठ्यक्रम, अत्यधिक सख्त व पंडिताऊ है जो बालक/बालिका की वर्तमान आवश्यकताओं या भविष्य की आवश्यकताओं की ओर तथा बालक/बालिका के विकास हेतु बहुत कम प्रासंगिक है। इन दिनों, एक बच्चे के द्वारा हासिल ज्ञान के व्यवहारिक प्रयोग की ओर बहुत कम प्रयास किए जा रहे हैं।

हमने एक पाठ्यक्रम के साथ ऐसी पद्धति की परिकल्पना की है जो पूर्ण सैद्धांतिक न होकर विस्तृत व व्यवहारिक है। साथ ही, यह लचीली भी है जो कक्षा सातवी तक हमारे उद्देश्यो की प्राप्ति हेतु हमारे नवीन विचार व तकनीकों को आसानी से समायोजित कर सकती है।

एट द किण्डरगार्डन लेवल (किण्डरगार्टन स्तर पर)

‘‘बहुत ही छोटे बच्चे की शिक्षा का उद्देश्य उन्हें विद्यालय के लिए तैयार करने के लिए नहीं बल्कि जीवन के लिए तैयार करने के लिए होना चाहिए।‘‘ – मरिया मांटेसरी

  • बालक/बालिका को ऐसा वातावरण दिया जाता है जिसमें वह सभी अधिगम्-गतिविधियों का आनंद उठाता है तथा औपचारिक लेखन के पूर्व की तैयारी, सुनियोजित व विविध गतिविधियों के द्वारा, सूक्ष्म स्नायु कौशल के विकास के साथ करता है।
  • साथ ही, मौखिक अभिव्यक्ति द्वारा आत्मविश्वास विकसित करने हेतु बालक/बालिका प्रेरित होते है तथा व्यक्तिगत् सृजनात्मकता का विकास चित्रकारी, चित्रकला इत्यादि के द्वारा करते है।
  • अंग्रेजी व हिन्दी दोनों भाषाओं में मौखिक कला के विकास (पठन व लेखन कला के लिए पूर्व अपेक्षित) और अंकों की बौद्धिक जागृति एवं उनके सरल व मूलभूत प्रयोग पर ज़ोर दिया जाता है।
  • कोई परीक्षा या अंक प्रणाली नहीं होती अपितु बच्चे की प्रगति का विस्तृत विवरण पालक एक शैक्षणिक सत्र में दो बार अक्टूबर व मार्च में प्राप्त करते हैं।

एट द प्रि-प्रायमरी लेवल (पूर्व प्राथमिक स्तर पर)

  • हम अभ्यास-पुस्तकों का प्रयोग करते हैं लेकिन पाठ्य-पुस्तकों का नहीं। विद्यालय के पुस्तकालय से बच्चों में अपेक्षित कौशल (दक्षता) के विकास हेतु पुस्तकों की मदद ली जाती है पुनर्बलन व पुनरावलोकन के लिए हम अभ्यास-पत्र बनाते व प्रयोग करते हैं जो कक्षा या घर में पूरे किए जाते हैं।
  • कक्षा चौथी तक बच्चे हिन्दी व अंग्रेजी भाषाओं में पर्याप्त मौखिक, पठित व लिखित कलाओं, संस्कृत भाषा में मौखिक कौशल, उम्र/कक्षा स्तरीय गणितीय सवालों को समझने व उनके प्रयोगों को करने का कौशल तथा कम्प्यूटर के विभिन्न सृजनात्मक उपयोगों के कौशल का विकास करते हैं। इतिहास, भूगोल व मूलभूत विज्ञान का ज्ञान भाषाओं के शिक्षण द्वारा दिया जाता है। इन विशुद्ध शैक्षणिक कौशल के अलावा चित्रकारी, नाटक, सार्वजनिक संभाषण आदि के द्वारा सृजनात्मक विचार, क्रिया तथा व्यक्तिगत् विकास को प्रोत्साहित किया जाता है।
  • यहाँ किसी प्रकार की औपचारिक परीक्षा नहीं होती। इसकी जगह यहाँ सतत् मूल्यांकन एवं पुनरावलोकन की प्रक्रिया वर्ष भर चलती रहती है। एक विस्तृत एवं विषयवार मूल्यांकन व गुण संबंधी रिपोर्ट पालकों को सत्र में दो बार अक्टूबर व मार्च के अन्त में दी जाती है।

एट द प्रायमरी/मिडिल लेवल (5 टू 7) (प्राथमिक /माध्यमिक स्तर (पांचवी से सातवीं ) पर)

कक्षा पाँचवी व ऊपर के बच्चे प्रोग्रेसिव एज्युकेशन II (पीई II) में स्वतः समायोजित कर लिए जाते हैं। पीई II कक्षा दसवीं व बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए सीआईएससीई (CISCE) नई दिल्ली से सम्बद्ध है और एक पंजीकृत निकाय ‘‘फ्रेन्ड्स आफ चिल्ड्रन सोसायटी’’ के द्वारा संचालित होता है।

हम अभ्यास-पुस्तकों का प्रयोग करते हैं लेकिन पाठ्य-पुस्तकों का नहीं। विद्यालय के पुस्तकालय से बच्चों में अपेक्षित कौशल (दक्षता) के विकास हेतु पुस्तकों की मदद ली जाती है पुनर्बलन व पुनरावलोकन के लिए हम अभ्यास-पत्र बनाते व प्रयोग करते हैं जो कक्षा या घर में पूर्ण किए जाते हैं।

कक्षा चौथी तक बच्चे हिन्दी व अंग्रेजी भाषाओं में पर्याप्त मौखिक, पठित व लिखित कलाओं, संस्कृत भाषा में मौखिक कौशल, उम्र/कक्षा स्तरीय गणितीय सवालों को समझने व उनके प्रयोगों को करने का कौशल, कम्प्यूटर के विभिन्न सृजनात्मक उपयोगों के कौशल का विकास करते हैं। इतिहास, भूगोल व मूलभूत विज्ञान का ज्ञान वातावरण विज्ञान के शिक्षण द्वारा दिया जाता है।

कक्षा पाँचवी से बच्चों का इसी क्रम में विकास जारी रहता है और संस्कृत में भी लेखन की शुरुआत होती है। सामाजिक विज्ञान के विषय भूगोल, इतिहास व सामान्य विज्ञान के विषय भौतिकी, रसायन शास्त्र तथा जीव विज्ञान अब अलग-अलग विषयों के रूप में आरंभ किए गए हैं। इसके साथ ही हम बच्चों को अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए शिक्षण-कौशल के लिए शिक्षित करते हैं। इन विशुद्ध शैक्षणिक कौशल के अलावा चित्रकारी, नाटक, सार्वजनिक संभाषण आदि के द्वारा सृजनात्मक विचार, क्रिया तथा व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित किया जाता है।

कक्षा सातवी तक यहाॅँ किसी प्रकार की औपचारिक परीक्षा नहीं होती। इसकी जगह यहाँ सतत् मूल्यांकन एवं पुनरावलोकन की प्रक्रिया वर्ष भर कक्षा में लिए गए ‘‘परीक्षण’’ (टेस्ट) द्वारा चलती रहती है। पुनरावलोकन का सिर्फ यह उद्देश्य है कि शिक्षक/शिक्षिका विद्यार्थियों को सम्बन्धित विषय का ज्ञान एवं सोचने की क्षमता को बढ़ावा देने में सफलतापूर्वक सक्षम हो। ये जाँच परीक्षाएँ बच्चे में लिखित परीक्षा हेतु आवश्यक कौशल के विकास के लिए भी तैयार की जाती है।

एक विस्तृत एवं विषयवार मूल्यांकन व रिपोर्ट पालकों को सत्र में दो बार अक्टूबर व मार्च के अन्त में दी जाती है। सामान्यतः कक्षा आठवी तक विद्यार्थी को पुनः उसी कक्षा को दोहराने की आवश्यकता नहीं पड़ती है, यद्यपि उस कक्षा में विद्यार्थी की विद्यालय में एक सुनिश्चित उपस्थिति हो। ऐसे मामले में विद्यालय द्वारा विचार भी किया जा सकता है, ऐसा विद्यार्थी की योग्यता एवं निर्णय संप्रेषण पर निर्भर करता है।

होमवर्क (गृहकार्य)

पूर्व प्राथमिक स्तर पर एक बच्चे के लिए विद्यालय में एक दिन में 6 घंटे व्यतीत करना सामान्यतः पर्याप्त ‘कार्य’ होता है। गृहकार्य की वर्तमान अवधारणा एक शिक्षक के लिए शिक्षण को आसान बनाना, पालकों को विद्यालय पाठ्यक्रम में कितना पढ़ाया यह बताना, तथा निजी शिक्षण को बढ़ावा देना है। हम इस अवधारणा का पक्ष नहीं लेते और यह विश्वास करते हैं कि गृहकार्य:

  • एक मनोरंजक स्व-प्रयत्न हो।
  • जहाँ तक संभव हो रचनात्मक हो।
  • विद्यालय में पठित तथ्यों का पुनर्बलन हो।
  • छोटी अवधि का हो।

एट क्लास 8 एण्ड एट द सेकेण्डरी/सीनियर सेकेण्डरी लेवल (कक्षा 8वीं तथा उच्च एवं उच्चत्तर माध्यमिक स्तर पर)

कक्षा आठवी में, विद्यार्थी उन ऐच्छिक विषयों का चुनाव करते हैं जो वे दसवीं बोर्ड की परीक्षा में देने के इच्छुक होते हैं और इस तरह आईसीएसई (दसवीं) परीक्षा के लिए तीन वर्ष पूर्व ही तैयारी की शुरूआत हो जाती है। इस कक्षा में, हम कक्षा नौंवी की कुछ चयनित पाठ्यपुस्तकों का उपयोग आवश्यकता पड़ने पर करते हैं। एक परीक्षा सत्र के मध्य में तथा एक परीक्षा सत्र के उत्तरार्ध में आयोजित की जाती है और विभिन्न विषयों में श्रेणी (ग्रेड) दी जाती हैं। इन परीक्षाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को आईसीएसई (ICSE) परीक्षा हेतु तैयार करना है एवं उन्हें ऐच्छिक विषयों के चुनाव में मदद करना है। कक्षा नौंवी में अगस्त माह के पश्चात् उस सत्र हेतु विषय बदलना संभव नहीं होगा। वर्ष में दो मूल्यांकन रिपोर्ट दिया जाना जारी रहेगा।

ऐसी दशा में जब कक्षा आठवी में बालक/बालिका अपेक्षित स्तर की प्राप्ति नहीं कर पाते और उच्च स्तर में शामिल होने हेतु तथा दसवीं के अंत में आईसीएसई परीक्षा उत्तीर्ण करने में असफल रहते है, तब विद्यालय ऐसे अभिभावकों से उसी अनुसार सलाह-मशवरा करेगा। अभिभावक तथा विद्यार्थी के पास तब ये विकल्प होंगे कि वे:-

  • विद्यार्थी ऐच्छिक विषयों को एक बार ही बदल सकते हैं, या
  • यहीं जारी रहे और आईसीएसई परीक्षा उत्तीर्ण न कर सकने के परिणाम भुगतने को नियमानुसार तैयार रहें, या
  • सीबीएसई या राज्य बोर्ड शिक्षा प्रणाली वाले किसी अन्य विद्यालय में जाएँ, या
  • विद्यालय व अभिभावक / विद्यार्थी की आपसी सहमति पर कक्षा दोहराएँ।

कक्षा आठवी से बारहवीं तक, निर्धारित पाठ्यपुस्तकों का उपयोग बच्चों को इंडियन सर्टिफिकेट आफ सेकण्डरी एज्युकेशन (ICSE) दसवीं तथा इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (ISC) बारहवीं परीक्षाओं हेतु तैयार करने के लिए किया जाएगा। अभ्यास-परीक्षा तथा मूल्यांकन/रिपोर्ट पद्धति पूर्ववत् जारी रहेगी।

अनिवार्य विषय अंग्रेजी (भाषा, साहित्य) एवं पर्यावरण शिक्षा के अतिरिक्त कक्षा ग्यारहवीं के लिए प्रस्तावित विषयों में हिन्दी, गणित, भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान, अर्थशास्त्र, वाणिज्य और संगणक शास्त्र है। साथ ही इतिहास, भूगोल तथा फैशन डिजाईनिंग भी उपलब्ध है यह विद्यार्थियों की संख्या पर निर्भर करेगा। ललित कला के विषय तथा संस्कृत चयनित आधार व आवश्यकता पर उपलब्ध हो सकते हैं। अन्य विषय भी विद्यार्थियों की संख्यानुसार जोड़े जा सकते हैं।

कृपया ध्यान दें

हमने अपने पाठ्यक्रम में उन सभी सूचनाओं, ज्ञान व कलाओं का समावेश किया है जो प्रचलित पद्धति द्वारा आईसीएसई/आईएससी (ICSE /ISC) बोर्ड की माध्यमिक/उच्चतर माध्यमिक स्तरों में सफलता प्राप्ति के लिए आवश्यक है।

  • हमारे विद्यार्थी अन्य विद्यालय में पढ़ने व/या भारत में कहीं भी प्रवेश परीक्षा या फिर विदेश में प्रवेश परीक्षा, जहाँ अंग्रेजी अथवा हिन्दी शिक्षा का माध्यम है, में बैठने में सक्षम है।
  • उच्च/उच्चतर कक्षाओं के विद्यालयीन एवं उससे पूर्व के पाठ्यक्रम हेतु हम अभिभावक या अन्य द्वारा अनुशिक्षण या निजी शिक्षण में विश्वास नहीं करते तथा हमारे विद्यालय की शिक्षण-विधि इसे प्रोत्साहित नहीं करती।
  • हम उन सभी पुस्तकों व शिक्षण-सामग्रियों की व्यवस्था करते हैं जो विद्यालय में शिक्षण प्रक्रिया हेतु आवश्यक है।
  • एक विस्तृत एवं विषयवार मूल्यांकन व गुण संबंधी रिपोर्ट पालकों को सत्र में दो बार अक्टूबर व मार्च में एवं बोर्ड परीक्षा वर्ष में फरवरी में दी जाती है।

डिसीप्लीन (अनुशासन)

दण्ड (सजा) की अवधारणा को यहाँ सख्त हतोत्साहित किया जाता है। हम बच्चे से बात कर उस कारण का पता लगाते हैं जो बच्चे के द्वारा अनापेक्षित कार्य व शब्द को प्रेरित करते हों।

इस विद्यालय में शारीरिक दंड का कोई प्रावधान नहीं है।

एक्टीविटी (गतिविधियाँ)

बच्चे नाटक, वाद-विवाद, सार्वजनिक-संभाषण, संगीत, नृत्य, कला एवं शिल्प इत्यादि विकासात्मक गतिविधियों में भाग लेते हैं जो बच्चे के व्यक्तित्व की सकारात्मक विशेषताओं की बढ़ोतरी करते हैं तथा उनकी क्षमताओं एवं गुणों को विकसित करते हैं। ये गतिविधियाँ साल दर साल सुविधाओं/संसाधनों की वृद्धि के साथ जुड़कर बढ़ती चली जाती हैं।

स्पोर्ट्स (खेल)

हमारे विचारों से खेल एक मनोरंजनात्मक व्यायाम है जो कुछ अपेक्षित मूल्यों को संजोने के काम आता है।

यह पता लगाने के लिए कि क्या वह किसी खास खेल में आगे विकास करना चाहेगा हम बच्चे को खेलकूद तथा सामान्य प्रशिक्षण प्रदान करते हैं तथा इसके बाद अभिभावक तथा विद्यालय उसे उसके प्रयासों में सहायता कर सकते हैं ।

राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. 59-ए (एनएच 59 ए) स्थित पूर्वी प्रांगण में अनेक एवं विविध खेल गतिविधियों हेतु विस्तृत खुली जगह है। प्रतिस्पर्धा श्रेणी के खेलकूद प्रदान करने के प्रयास को यहाँ प्रोत्साहित किया जा रहा है।

जैसी हमारी विद्यालय नीति है, सभी बच्चे स्वास्थ्य या अनुशासनात्मक कारणों को छोड़कर, दैनिक पाठ्यक्रम में निर्धारित गतिविधि-कालांशों में विभिन्न खेलों में भाग लेते हैं।

इंटरेक्शन् एण्ड फीडबैक (अंतःक्रिया एवं पुनर्निवेशन)

यह विद्यालय अपने कार्यक्षेत्र में उचित आचार व्यवहार वाला एक पेशेवर (प्रोफेशनल) संगठन है।

हमारे कर्मचारीगण प्रेरित, संगठित, अनुभवी है तथा कार्य के दौरान भी सतत् प्रशिक्षणरत् रहते हैं जो इस संगठन के उद्देश्यों तथा प्रत्येक कक्षा-स्तरीय उद्देश्यों की पूर्ति के लिए रचनात्मक व सृजनात्मक होने को स्वतंत्र है।

पालकगण अपने बच्चे के विकास से संबंधित विस्तृत चर्चा शिक्षकों से फोन पर पूर्व सूचित कर या सूक्ष्म चर्चा पालक-शिक्षक सभा (मीटिंग) के दौरान कर सकते हैं।

कुछ बच्चों के लिए जरूरी अतिरिक्त सहायता अथवा अपूर्ण कक्षा कार्य को पूर्ण कराने हेतु सुधार-कक्षाएँ (रिमेडिअल) विद्यालय के अवकाश/शनिवारीय अवकाश में लग सकती है और अभिभावकों से यह अपेक्षित है अपने बच्चे को सुधार-कक्षाओं के दौरान घर से लाने व वापस ले जाने की व्यवस्था स्वयं करनी होगी।

जिन बच्चों की पढ़ाई न कर पाने के मामले में या असक्षमता के बारे में संदेह है उनकी जाँच करने के लिए हमारी टीम के सदस्यों को प्रशिक्षित कर तैयार किया गया है। वर्तमान में हमारे पास ऐसे कई मामलों में रिपोर्ट र्है, जो उन बच्चों को संभालने तथा परामर्श देने के लिए सुसज्जित हैं जिन्होने स्वयं को प्रस्तुत किया है, किंतु, यह ​अधिगम् या विशेष आवश्यकताओं वाले मामलों के लिए नहीं है।

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